फ़रिश्तों पर ईमान | जानने अल्लाह

फ़रिश्तों पर ईमान

मुह़म्मद बिन सालेह अल-उसैमीन

हम अल्लाह ताआला के फ़रिश्तों पर ईमान रखते हैं और यह कि वेः

“सम्मानित बन्दे हैं, उसके समक्ष बढ़कर नहीं बोलते और उसके आदेशों पर कार्य करते हैं।”

सूरह अल्-अम्बियाः 26-27

अल्लाह तआला ने उन्हें पैदा फ़रमाया, तो वे उसकी उपासना में लग गए तथा आज्ञा पालन के लिए आत्म समर्पण कर दिए।

“वे उसकी उपासना से न अहंकार करते हैं और न ही थकते हैं। दिन-रात उसकी पवित्रता वर्णन करते हैं और ज़रा सी भी सुस्ती नहीं करते।”

सूरह अल्-अम्बियाः 19-20

अल्लाह तआला ने उन्हें हमारी नज़रों से ओझल रखा है, इसलिए हम उन्हें देख नहीं सकते। अल्बत्ता, कभी-कभी अल्लाह तआला अपने कुछ बन्दों के लिए उन्हें प्रकट भी कर देता है। जैसा कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने जिब्रील अलैहिस्सलाम को उनके असली रूप में देखा। उनके छः सौ पंख थे, जो क्षितिज (उफ़ुक़) को ढाँपे हुए थे। इसी प्रकार जिब्रील अलैहिस्सलाम मरयम अलैहस्सलाम के पास सम्पूर्ण आदमी का रूप धारण करके आये, तो मरयम अलैहस्सलाम ने उनसे बातें कीं तथा उन्हें उनका उत्तर दिया।

और एक बार प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास सह़ाबा किराम मौजूद थे कि जिब्रील अलैहिस्सलाम एक मनुष्य का रूप धारण करके आ गये, जिन्हें न कोई नहीं पहचानता था और न उनपर यात्रा का कोई प्रभाव दिखाई दे रहा था। कपड़े बिल्कुल उजले और बाल बिल्कुल काले थे। वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने घुटना से घुटना मिलाकर बैठ गए और अपने दोनों हाथों को आपके दोनों रानों पर रखकर आपसे सम्बोधित हुए। नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उनके जाने के पश्चात सह़ाबा को बताया कि वह जिब्रील अलैहिस्सलाम थे।

और हमारा ईमान है कि

फ़रिश्तों के ज़िम्मे कुछ काम लगाये गये हैं।

उनमें से एक जिब्रील अलैहिस्सलाम हैं, जिनको वह़्य का कार्यभार सोंपा गया है, जिसे वह अल्लाह के पास से लाते हैं तथा अंबिया एवं रसूलों में से जिसपर अल्लाह तआला चाहता है, नाज़िल करते हैं।

तथा उनमें से एक मीकाईल अलैहिस्लाम हैं, जिनको वर्षा एवं वनस्पति की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी है।

तथा उनमें से एक इस्राफ़ील अलैहिस्सलाम हैं, जिन्हें क़यामत आने पर पहले लोगों को बेहोशी के लिए फिर दोबारा ज़िन्दा करने के लिए सूर फूँकने का कार्यभार दिया गया है।

तथा उनमें से एक मालिक हैं, जो जहन्नम के दारोगा हैं।

तथा कुछ फ़रिश्ते उनमें से माँ के पेट में बच्चों के कार्यों पर नियुक्त किए गये हैं। तथा कुछ फ़रिश्ते आदम अलैहिस्सलाम की संतान की रक्षा के लिए नियुक्त हैं।

तथा कुछ फ़रिश्तों के ज़िम्मे मनुष्य के कर्मों का लेखन क्रिया है। हरेक व्यक्ति पर दो-दो फ़रिश्ते नियुक्त हैं।

“जो दायें-बायें बैठे हैं, उनकी (मनुष्य की) कोई बात ज़ुबान पर नहीं आती, परन्तु रक्षक उसके पास लिखने को तैयार रहता है।”

सूरह क़ाफ़ः 17-18

उनमें से एक गिरोह मैयित से सवाल करने पर नियुक्त है। जब मैयित को मृत्यु के पश्चात अपने ठिकाने पर पहुँचा दिया जाता है, तो उसके पास दो फ़रिश्ते आते हैं और उससे उसके प्रभु, उसके दीन तथा उसके नबी के सम्बंध में प्रश्न करते हैं, तो

“अल्लाह तआला ईमानदारों को पक्की बात पर दृढ़ रखता है सांसारिक जीवन में भी तथा परलोकिक जीवन में भी। तथा अल्लाह तआला अन्याय करने वालों को भटका देता है। और अल्लाह तआला जो चाहता है, करता है।”

सूरह इब्राहीमः 27

और उनमें से चंद फ़रिश्ते जन्नतियों के यहाँ नियुक्त हैं

“फ़रिश्ते हरेक द्वार से उनके पास आयेंगे और कहेंगेः सलामती हो तुमपर तुम्हारे धैर्य के बदले, परलोकिक घर क्या ही अच्छा है!”

सूरह अर-रअदः 23-24

तथा प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने बताया कि आकाश में बैतुल मामूर है, जिसमें रोज़ाना सत्तर हज़ार फ़रिश्ते प्रवेश करते हैं –एक रिवायत के अनुसार उसमें नमाज़ पढ़ते है- और जो एक बार प्रवेश कर जाते हैं, उनकी बारी दोबारा कभी नहीं आती।

Previous article Next article

Related Articles with फ़रिश्तों पर ईमान

  • अक़ीदा के लाभ एवं प्रतिकार

    मुह़म्मद बिन सालेह अल-उसैमीन

    इन महान नियमों पर आधारित यह उच्च अक़ीदा अपने मानने वालों के लिए अति श्रेष्ठ प्रतिफल एवं परिणामों का वाहक है।

    12/04/2018 1551
  • क़यामत (महाप्रलय) पर ईमान

    मुह़म्मद बिन सालेह अल-उसैमीन

    हमारा ईमान आख़िरत के दिन पर है। वह क़यामत का दिन है। उसके पश्चात कोई दिन नहीं। उस दिन अल्लाह तआला लोगों को दोबारा

    12/04/2018 2817
  • इफ्तार के समय रोज़ेदार की दुआ

    Site Team

    जब हम रोज़ेदार हों तो रोज़ा खोलते समय कौन सी दुआ पढ़ें ? हर प्रकार की प्रशंसा और गुणगान केवल अल्लाह के लिए योग्य

    17/11/2013 1226