वास्तविक धर्म-शास्त्र | जानने अल्लाह

वास्तविक धर्म-शास्त्र

Site Team

वास्तव में इस्लामी अहकाम केवल खयालात की दुनिया में बयान नहीं किये जाते बलिक यह एक वास्तविक धर्म है जो मानवता की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है तथा उनके सभी मामलात में कठिनाइयों को दूर करता है।

और इस्लाम के वास्तविक रूप में से यह है कि यह मानव प्रÑति के अनुसार है इस के विपरीत नहीं।

बलिक इस ने इस (मानव- प्रकृति) को उत्तमता तथा ऊँचे आदर्श की दिशा दी और इस्लाम ने इसी कारण विवाह को वैध ठहराया तथा उस पर उभारा और इस ने व्यभिचार और विवाह की सीमा से बाहर रह कर यौन संबंध क़ायम करने को अवैध बतलाया और इस के द्वारा खानदान के टुकड़े टुकड़े होने और उसे नष्ट होने से बचाया तथा एक पाक-साफ धार्मिक तरीक़े से यौन संबंध रचाने का आदेश दे कर स्वभाव के हित का पालन किया और इस्लाम ने व्यकितगत सम्पत्ति को वैध ठहराया, व्यकित जितनी सम्पत्ति चाहे रख सकता है परन्तु यह वैध रूप से जमा किया गया हो, ठीक उसी समय इस्लाम ने इस बात से रोका कि कुछ धनवानों के पास ही सारा माल एकत्र हो कर रह जाए जबकि बाक़ी लोग भूक का कष्ट उठा रहे होँ, तो यह चीज़ भी इस्लाम से संबंधित नहीं है।

Previous article Next article

Related Articles with वास्तविक धर्म-शास्त्र

  • पूर्ण धर्म शास्त्र

    Site Team

    जैसा कि हम पहले वर्णन कर चुके हैं कि इस्लाम एक पूर्ण धर्म है, एक विस्तृत निज़ाम तथा पूरे जीवन का एक ऐसा दस्तूर है

    04/03/2013 2458
  • कोमल धर्म-शास्त्र

    Site Team

    बेशक इस्लाम ने समय, स्थान और अवस्था के परिवर्तन को यूँ ही नहीं छोड़ दिया बलिक विद्वानों को नये मसाइल के संबंध में

    04/03/2013 2108
  • सरल धर्म-शास्त्र

    Site Team

    नि:सन्देह आसानी एंव सरलता इस्लाम की एक महत्वपूर्ण विशेषता है और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को किसी दो चीज़ों में

    07/03/2013 1619
जानने अल्लाहIt's a beautiful day