क्या अल्लाह सर्वशक्तिमान सब कुछ कर सकता है ?

Yousef Estes

क्या अल्लाह सर्वशक्तिमान सब कुछकर सकता है ?

प्रश्न यह है"क्या अल्लाह सर्वशक्तिमान एक इतनी बड़ी चट्टान पैदा कर सकता है जिसे कोई हिला न सके ?"अगर वह एक इतनी बड़ी चट्टान को बना सकता है जिसे कोई हिला न सके तो क्या इसका मतलब यह नकल सकता है कि उसे अल्लाह सर्वशक्तिमान भी न हिला सके? या यह बात असंभव है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान इतनी बड़ी चीज़ को पैदा करे जिसको वह खुद भी न हिला सके ?)वास्तव में हर वह बात जो उसकी हसती या उसके किसी गुण में कमी का कारण बने वह बात उसके लिए असंभव है क्योंकि उसकी हसतीनिपुण और उत्कृष्ट है l(
अल्लाह सर्वशक्तिमान हमें बताता है कि वह जो चाहता है और फैसला करता है वह करता है lलेकिनहमें यह बातध्यान में रखना चाहिए कि इस्लामी दृष्टिकोण से अल्लाह सर्वशक्तिमान अपने देवत्व की विशेषताओं के विपरीत का इरादा नहीं करता है lमतलब यह है कि वह कभी मर नहीं सकता है क्योंकि यह उसके अमर होने की विशेषता के प्रतिकूल है lऔर उसका उमर होना तो शुभ क़ुरआन में वर्णित गुणों में से एक है) l
इसलिए, उसके लिए यह संभव है कि वह एक ऐसी चट्टान को पैदा करे जो इतनी  बड़ी और भारी हो कि  पूरे ब्रह्मांड में से कोई भी उसे हिला न सके लेकिन वह खुद उसे हिला सके क्योंकि वह ब्रह्मांड की प्राणियों की तरह नहीं है lइसलिए कि अल्लाह सृष्टि के नियमों का अधीन नहीं है, क्योंकि वही निर्माता और सारे नियमों को बनानेवाला है lऔर जब भी वह कुछ करना चाहता है तो बस उसे करने के लिए “हो जा”कहता है और तुरन्त वह चीज़ हो जाती है l
अल्लाह सर्वशक्तिमान खुद अपने विषय में फ़रमाता है :

(بديع السموات و الأرض و إذا قضى أمرا فإنما يقول له كن فيكون) سورة البقرة، الآية: 117.

(वह आकाशों और धरती का प्रथमतः पैदा करनेवाला है। वह तो जब किसी काम कानिर्णय करता है, तो उसके लिए बस कह देता है कि "हो जा" और वह हो जाता हैl)(सूरा अल-बक़रह: ११७)
एक और जगह पर आया है :

(قالت رب أنى يكون لي ولد و لم يمسسني بشر قال كذلك الله يخلق ما يشاء إذا قضى أمرا فإنما يقول له كن فيكون) )سورة آل عمران، الآية: 47(

(वह बोली, "मेरे रब! मेरे यहाँ लड़का कहाँ से होगा, जबकि मुझे किसी आदमी नेछुआ तक नहीं?" कहा, "ऐसा ही होगा, अल्लाह जो चाहता है, पैदा करता है। जब वहकिसी कार्य का निर्णय करता है तो उसको बस यही कहता है 'हो जा' तो वह होजाता है l) (सुरा,आलि इमरान: ४७)

और अल्लाह सर्वशक्तिमान फ़रमाता है:

(إن مثل عيسى عند الله كمثل آدم خلقه من تراب ثم قال له كن فيكون) )سورة آل عمران، الآية: (५९

(निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि में ईसा की मिसाल आदम जैसी है कि उसे मिट्टी से बनाया, फिर उससे कहा, "हो जा", तो वह हो जाता है) (सुरा,आलि इमरान: ५९)
और शुभ क़ुरआन में एक जगह पर आया है:

)و هو الذي خلق السموات و الأرض بالحق و يوم يقول كن فيكون قوله الحق و له الملك يوم ينفخ في الصور عالم الغيب و الشهادة و هو الحكيم الخبير) سورة الأنعام، الآية: 73(

("और वही है जिसने आकाशों और धरती को हक़ के साथ पैदा किया। और जिस समय वहकिसी चीज़ को कहे, 'हो जा', तो वह उसी समय हो जाती है। उसकी बात सर्वथासत्य है और जिस दिन 'सूर' (नरसिंघा) में फूँक मारी जाएगी, राज्य उसी काहोगा। वह सभी छिपी और खुली चीज़ का जाननेवाला है, और वही तत्वदर्शी, ख़बररखनेवाला है।") (सूरा अल-अनआम: ७३)
इस विषय में एक और जगह पर आया है:

(إنما قولنا لشيء إذا أردناه أن نقول له كن فيكون) سورة النحل، الآية: 40.

(किसी चीज़ के लिए जब हम उसका इरादा करते है तो हमारा कहना बस यही होता है कि उससे कहते है, "हो जा!" और वह हो जाती है l)सूरा अन्-नहल: ४०)

और सूरा मरयम में एक जगह पर अल्लाह सर्वशक्तिमान का फ़रमान है:


)ما كان لله أن يتخذ ولدا سبحانه إذا قضى أمرا فإنما يقول له كن فيكون(سورة مريم، الآية: 35 

(अल्लाह ऐसा नहीं कि वह किसी को अपना बेटा बनाए। महान और उच्च है, वह! जब वहकिसी चीज़ का फ़ैसला करता है तो बस उसे कह देता है, "हो जा!" तो वह होजाती है। ) (सूरा मरयम:३५)

इसी तरह अल्लाह सर्वशक्तिमान फ़रमाता है:

(إنما أمره إذا أراد شيئا أن يقول له كن فيكون) سورة يس، الآية: 82.


(उसका मामला तो बस यह है कि जब वह किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करता है तो उससे कहता है, "हो जा!" और वह हो जाती है l) (सूरा यासीन:८२)

और शुभ क़ुरआन में एक जगह फ़रमाया है:


(هو الذي يحيي و يميت فإذا قضى أمرا فإنما يقول له كن فيكون) )سورة غافر، الآية: 68(


(वही है जो जीवन और मृत्यु देता है, और जब वह किसी काम का फ़ैसला करता है, तो उसके लिए बस कह देता है कि 'हो जा' तो वह हो जाता है l) (सूरा ग़ाफ़िर:६८)
प्रिय पाठक! आपने इन पवित्र आयतों में देख लिया है कि निर्माण का कार्य परमेश्वर सर्वशक्तिमान के लिए कोई मुश्किल काम नहीं है, वह तो केवल आदेश देता है और तुरंत चीज़ उसकी इच्छा और उसके इरादे के अनुसार हो जाती है lलेकिन ऐसा कार्य जिस से उसके अस्तित्व, गुण, विशेषता या नाम में कमी आती है वह

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