क्या अल्लाह परोक्ष (छिपी हुई बातों) को जानता | जानने अल्लाह

क्या अल्लाह परोक्ष (छिपी हुई बातों) को जानता

Yousef Estes

क्या अल्लाह सर्वशक्तिमान भविष्य में घटनेवाली घटनाओं को जानता है? क्या अल्लाह सर्वशक्तिमान सब चीज़ के परिणामों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है?और यदि ऐसा हैतो वह हमारे लिए इन्साफ़ करनेवाला कैसे हो सकता है?और फिर हम अपने कामों में चुनाव करने के अधिकारी हैं ? और क्या हमें हमारे इरादा की स्वतंत्रता प्राप्त है ?
जी हाँ अल्लाह सर्वशक्तिमान हर घटनेवाली घटना को घटने से पहले जानता है lउसने सब से पहले क़लम को बनाया और क़लम को लेखने का आदेश दिया lतो क़लम ने लिखा बल्कि क़लम ने जो कुछ भी होनेवाला था लिख दिया, इस प्रकार परमेश्वर सर्वशक्तिमान ने ब्रह्मांड को बनाना शुरू किया और यह सब को वह पैदा करने से पहले उसे जानता था lसभी समय उसे उनपर पूरा पूरा नियंत्रण है lऔर जो जो चीज़ भी पैदा होती है उसपर उसे सदा और सभी समय पूर्ण नियंत्रण रहता हैl
पवित्र क़ुरआन में आया है :

)و يتوب الله على من يشاء و الله عليم حكيم)(سورة التوبة، الآية: 15(

(अल्लाह जिसे चाहेगा, उसपर दया-दृष्टि डालेगा। अल्लाह सर्वज्ञ, तत्वदर्शी है l)(सूरा तौबा:१५)

और अल्लाह सर्वशक्तिमान फ़रमाता है :

)إن ربي لطيف لما يشاء إنه هو العليم الحكيم)(سورة يوسف، الآية: 100(

(निस्संदेह मेरा रब जो चाहता है उसके लिए सूक्ष्म उपाय करता है। वास्तव में वही सर्वज्ञ, अत्यन्त तत्वदर्शी है l)(सूरा यूसुफ :१००)
याद रहे कि केवल अल्लाह अकेले ही स्वतंत्र इच्छा का मालिक है, और वह जो चाहता है चाहता है, और हमेशा वही होता है जो वह चाहता है ,हामारे बीच "चुनाव की स्वतंत्रता" का एक शब्द बोला जाता है l दोनों के बीच अंतर यह है कि अल्लाह सर्वशक्तिमान जो भी चाहता है वह हमेशा होकर रहता है, और हम जो चाहते हैं वह कभी होता है और कभी नहीं भी होता है lचीजों के परिणाम पर अल्लाह हम से हिसाब नहीं लेगा लेकिन वह उन विकल्पों पर हिसाब लेगा जो हम चुनते हैं lइसका मतलब यह है कि हमारा इरादा हर हर कार्य में और हमेशा मूल है lजो भी हमारा इरादा होता है उसे ही देखा जाएगा और हम उसी के लिए जवाबदेह होंगे lऔर प्रत्येक व्यक्ति को अल्लाह सर्वशक्तिमान के पास उसी योग्यता के अनुसार जवाबदेह होना पड़ेगा जो अल्लाह ने उसे दिया है l और उससे पूछा जाएगा कि वह क्षमताओं को कैसे प्रयोग किया और उनके इस्तेमाल के समय क्या इरादा रखता था l
और क़ियामत के दिन के हिसाब के बारे में अल्लाह सर्वशक्तिमान ने बता दिया कि जो कुछ भी हम करते हैं उन सब को लिखा जाता है और इस रिकॉर्डिंग से कोई भी चीज़ कितनी छोटी से छोटी हो छुट नहीं सकती और जो भी एक तिनका बराबर भी भलाई करेगा तो वह क़ियामत के दिन उसे मिल जाएgiiगी  और अगर कोई तिनका बराबर बुराई करेगा तो वह उसे उस दिन देख लेगाl
उस दिन (यानी हिसाब के दिन) लोगों को विभिन्न समूहों में विभाजित किया जाएगा, और उनके कार्यों को उनके सामने रखा जाएगा l

अल्लाह सर्वशक्तिमान का फ़रमान है:

)فمن يعمل مثقال ذرة خيرا يره و من يعمل مثقال ذرة شرا يره)(سورة الزلزلة، الآية: 6-8(

(अतः जो कोई कणभर भी नेकी करेगा, वह उसे देख लेगा lऔर जो कोई कणभर भी बुराई करेगा, वह भी उसे देख लेगा l)(सूरा अज़-ज़िलज़ाल:६-८)
और जो हमारे खिलाफ सबूत देगा वह कोई बेगाना नहीं होगा बल्कि हम खुद सबूत दे रहे होंगे, हमारे कान हमारी जीभ और हमारी आँखों क़ियामत के दिन अल्लाह सर्वशक्तिमान के सामने गवाही देगीlउस दिन किसी पर कोई अन्याय नहीं होगा और कोई कसी पर झूठ दोष नहीं दे सके गा l
अल्लाह के लिए यह संभव था कि हर व्यक्ति को बिना हिसाब-किताब उनके सही और उचित जगह में रख दे , लेकिन लोग यह शिकायात करते कि उनको नर्क में क्यों डाल दिया गया? उन्हें अवसर क्यों नहीं दिया गया? और यह जीवन है भी इसी लिए, यह एक अवसर है कि हम ख़ुद को साबित करके देख लें कि हम वास्तव में क्या हैं और अगर हमें स्वतंत्र चुनाव का अधिकार हो तो हम क्या कर सकते हैं l
अल्लाह जानता है कि क्या होगा, लेकिन हम नहीं जानते इसलिए, परीक्षण
अपनी जगह उचित है l

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